दवा से पहले “दाम” का खेल: जिला महिला अस्पताल में दलाली का जाल, पीड़ित ने डीएम से लगाई गुहार
जांच के नाम पर वसूली के आरोप, खून दिलाने के बहाने ₹9 हजार ठगे; पैसे न देने पर प्रसूता को लखनऊ रेफर करने का दावा
बाराबंकी। जनपद में स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सरकारी अस्पताल, जिन्हें गरीबों की आखिरी उम्मीद माना जाता है, अब आरोपों के घेरे में हैं। ताजा मामला जिला महिला अस्पताल से सामने आया है, जहां इलाज से पहले “दाम” और जांच से पहले “रकम” मांगने के आरोप लगे हैं।ग्राम लालापुर, थाना देवा निवासी मजदूर सज्जन के अनुसार, 13 मार्च 2026 को वह अपनी पत्नी निस्बा की डिलीवरी के लिए सीएचसी देवा पहुंचा था। हालत गंभीर बताकर उसे जिला महिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। दोपहर करीब एक बजे अस्पताल पहुंचने के बाद भर्ती तो कर लिया गया, लेकिन परिजनों का आरोप है कि इलाज शुरू होने से पहले ही पैसों की मांग शुरू हो गई।
पीड़ित का कहना है कि गरीबी का हवाला देने के बाद अचानक अस्पताल का रवैया बदल गया और कुछ ही देर में प्रसूता को “खून की कमी” बताकर लखनऊ रेफर कर दिया गया। आरोप है कि इसी दौरान अस्पताल परिसर में मौजूद एक व्यक्ति ने खून की व्यवस्था कराने के नाम पर ₹9 हजार ले लिए और फिर गायब हो गया।इतना ही नहीं, अस्पताल के बाहर खड़ी एक सफेद कार में बैठे कुछ लोगों द्वारा निजी अस्पताल ले जाने का दबाव बनाने और जबरन गाड़ी में बैठाने की कोशिश का भी आरोप है। मौके पर मौजूद लोगों ने वीडियो बनाना शुरू किया, जिसके बाद वे लोग वहां से भाग निकले।मरीज की हालत बिगड़ती देख परिजनों ने कर्ज लेकर दूसरे अस्पताल में इलाज कराया, जहां किसी तरह महिला की जान बच सकी। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने परिवार को आर्थिक और मानसिक रूप से तोड़ दिया।पीड़ित सज्जन ने पूरे मामले की शिकायत जिलाधिकारी से करते हुए निष्पक्ष जांच और दोषी डॉक्टरों, कर्मचारियों व कथित दलालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।वहीं अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मरीज को खून की कमी के कारण रेफर किया गया था। यदि पैसे मांगने की शिकायत सही पाई जाती है, तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं यह सवाल खड़ा करती हैं कि आखिर गरीब मरीज किस भरोसे सरकारी अस्पतालों का रुख करें। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और क्या स्वास्थ्य व्यवस्था में कोई सुधार होता है या नहीं।
