मसौली बाराबंकी। गोवर्धन का अर्थ है गो संवर्धन। भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत मात्र इसीलिए उठाया था कि पृथ्वी पर फैली बुराइयों का अंत केवल प्रकृति एवं गो संवर्धन से ही हो सकता है। उक्त विचार दिगंबरनाथ मंदिर सिसवारा पर चल रही श्रीमदभागवत कथा में मनहलवार को कथावाचक रामहेत यादव ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि अगर हम बिना कर्म करे फल की प्राप्ति चाहेंगे तो वह कभी नहीं मिलेगा, कर्म तो हमें करना ही होगा।
कथावाचक ने गोवर्धन पर्वत की कथा सुनाते हुए कहा कि इंद्र के कुपित होने पर श्रीकृष्ण ने गोवर्धन उठा लिया था। इसमें ब्रजवासियों ने भी अपना-अपना सहयोग दिया। श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों की रक्षा के लिए राक्षसों का अंत किया तथा ब्रजवासियों को पुरानी चली रही सामाजिक कुरीतियों को मिटाने एवं निष्काम कर्म के जरिए अपना जीवन सफल बनाने का उपदेश दिया।
इस मौके पर आयोजक ओमकार यादव,राकेश कुमार, किशोरीलाल वर्मा, गोकुल वर्मा, लल्लू वर्मा, इंद्रसेन यादव, अजय प्रजापति, विनोद राव, प्रदीप कुमार यादव, ज्ञानसिंह, अजय कुमार, अमरेश यादव, अवधेश कुमार लाइन मैन, भानुप्रताप रावत, आकाश वर्मा, ओमप्रकाश सहित आसपास के तमाम भक्त मौजूद रहे।
