संगठन संघर्ष और कानूनी संघर्ष होगा साथ-साथ

संगठन संघर्ष और कानूनी संघर्ष होगा साथ-साथ

परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सेवारत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा टेट को अनिवार्य किये जाने के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के विरोध में जनपद स्तर पर जिलाधिकारी के माध्यम से देश के प्रधानमंत्री , प्रदेश के मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री को संबोधित ज्ञापन, जनपद स्तर पर हजारों की शिक्षक संख्या के साथ धरना प्रदर्शन करके संपूर्ण भारत के सांसदो , मंत्रीगण ,विधायको ,विधान परिषद सदस्यो अन्य जनप्रतिनिधियो को ज्ञापन , हस्ताक्षर अभियान और काली पट्टी बांधकर शिक्षण कार्य करते रहने के संकल्प के साथ अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कुमार पांडे के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल कर दी गई है ।
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष डॉ0 राकेश सिंह ने बताया कि पुनर्विचार याचिका दाखिल करके माननीय सर्वोच्च न्यायालय से शिक्षकों के लिए राहत की मांग की गई है । शिक्षकों द्वारा अपने अधिकारों, गरिमा एवं सेवा सुरक्षा की लड़ाई को ऐतिहासिक एवं निर्णयात्मक मोड़ तक लड़ने के संकल्प के साथ सान्गठनिक एवं कानूनी संघर्ष साथ-साथ करने का फैसला लिया गया है ।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से उत्तर प्रदेश के लगभग एक लाख छियासी हजार और पूरे देश में लगभग 10 लाख शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा स्वयं पुनर्विचार याचिका दाखिल करना शिक्षकों के लिए एक सकारात्मक और स्वागत योग्य कदम है परंतु किसी भी स्तर पर कोई कानूनी चूक से बचने के लिए संगठन द्वारा पुनर्विचार याचिका स्वयं दाखिल की गई है । डॉ 0 राकेश सिंह ने कहा कि आर 0 टी 0 ई0 कानून लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों पर सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का सबसे अधिक प्रभाव पड़ा है । इन शिक्षकों की नियुक्ति शिक्षा का अधिकार कानून लागू होने से पहले लागू सेवा शर्तों नियमों के मुताबिक हुई है और उनकी नियुक्ति के समय शिक्षक पात्रता परीक्षा जैसी कोई अनिवार्यता नहीं थी। अब इन शिक्षकों में से अधिकांश शिक्षक 50 वर्ष से अधिक उम्र के है । टेट की अनिवार्यता पूर्व प्रभाव से लागू होने के कारण बड़ी संख्या में शिक्षक सेवा से बाहर हो जाएंगे और शेष को पदोन्नति भी नहीं मिलेगी । सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ शिक्षक संकल्पित होकर आर पार की लड़ाई लड़ेगा और शिक्षको के हितों को बचाने के लिए पूरी मजबूती के साथ सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष उनका पक्ष प्रस्तुत किया जाएगा ।

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