चिनहट में शराब माफियाओं की गुंडई — दो पत्रकारों को बंधक बनाकर पीटा, सिर फोड़ा
लखनऊ (चिनहट):
राजधानी लखनऊ के चिनहट कस्बे में शराब माफियाओं की दबंगई का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। देशी शराब की दुकान चलाने वाले ठेकेदारों और उनके गुर्गों ने दो पत्रकारों को बंधक बनाकर बेरहमी से पीटा। आरोप है कि पत्रकार जब ठेके पर अवैध बिक्री का वीडियो बना रहे थे, तभी माफियाओं ने उन पर लोहे की रॉड से हमला कर जान से मारने की धमकी दी।
पत्रकारों को बनाया बंधक, लोहे की रॉड से हमला
जानकारी के अनुसार, बाराबंकी निवासी पत्रकार सुनील कुमार और महेश चक्रवर्ती चिनहट कस्बे की एक देशी शराब की दुकान पर अवैध बिक्री की जानकारी मिलने पर मौके पर पहुंचे थे। दोनों जब वहां का वीडियो बना रहे थे, तभी ठेके पर मौजूद दबंग सेल्समैन और ठेकेदार पक्ष के लोगों ने उन्हें पकड़ लिया और बंधक बना लिया।
हमलावरों ने पत्रकार सुनील कुमार के सिर पर लोहे की रॉड से वार कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया। बताया जा रहा है कि किसी तरह दोनों ने अपनी जान बचाई। घटना की सूचना पर स्थानीय पार्षद मौके पर पहुंचे और दोनों पत्रकारों को छुड़वाया।
वीडियो बनाना पड़ा महंगा घायल पत्रकार की आपबीती
घायल पत्रकार सुनील कुमार ने बताया कि वह अपने किसी काम से गुजर रहे थे, तभी उन्होंने पास के मंदिर में दर्शन के लिए रुक गए। वहीं पर उन्होंने शराब की दुकान को देर रात खुला देखा। जब उन्होंने ठेके पर अवैध बिक्री का वीडियो बनाना शुरू किया, तो ठेकेदार पक्ष के लोग भड़क गए और उन पर हमला कर दिया।
सुनील कुमार का कहना है कि उन्होंने पहले दुकानदारों को समझाने की कोशिश की कि यह गलत है, लेकिन उनकी बात सुनने के बजाय माफियाओं ने उन पर लोहे की रॉड से वार कर दिया।
रातभर खुला रहता है ठेका, प्रशासन मौन
स्थानीय लोगों का कहना है कि चिनहट कस्बे की यह देशी शराब की दुकान सुबह 4:30 बजे से लेकर रात 1 बजे तक खुली रहती है। देर रात तक खुलेआम शराब बिकती है, लेकिन आबकारी विभाग और पुलिस प्रशासन पूरी तरह मौन हैं।
बताया जा रहा है कि यह ठेका किसी सुनील जायसवाल के नाम पर संचालित है और लंबे समय से यहां अवैध बिक्री का सिलसिला जारी है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, पुलिस और आबकारी विभाग की मिलीभगत के बिना यह संभव नहीं है।
स्वास्थ्य केंद्र में भी लापरवाही, डॉक्टर नहीं मिले
घटना के बाद पुलिस घायल पत्रकारों को चिनहट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) लेकर पहुंची, लेकिन वहां कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था।
काफी देर तक इंतज़ार के बाद भी मेडिकल परीक्षण नहीं हो सका। स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया कि यह अस्पताल हमेशा “भगवान भरोसे” चलता है — न समय पर डॉक्टर मिलते हैं, न ही जिम्मेदार कर्मचारी।
स्थानीय लोगों में आक्रोश — माफियाओं का आतंक, जिम्मेदार चुप
कस्बे के लोगों का कहना है कि यह ठेका अब स्थानीय आबादी के लिए सिरदर्द बन चुका है। आए दिन यहां झगड़े, शोरगुल और अवैध बिक्री की घटनाएं होती रहती हैं। बावजूद इसके, प्रशासन और विभागीय अधिकारियों की चुप्पी ने शराब माफियाओं के हौसले बुलंद कर रखे हैं।
अब बड़ा सवाल — प्रशासन मौन क्यों?
अब सवाल उठता है कि क्या चिनहट की यह शराब की दुकान प्रशासन की नाक के नीचे चल रही अवैध गतिविधियों का नतीजा है, या फिर माफियाओं के प्रभाव में विभाग मौन है?
जब सच दिखाने वाले पत्रकार ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की सुरक्षा की गारंटी कौन देगा?
