दुर्योधन के अहंकार का अंत और अश्वत्थामा के पाप की कथा सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु

दुर्योधन के अहंकार का अंत और अश्वत्थामा के पाप की कथा सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु
रामसनेहीघाट (बाराबंकी)। ग्राम पंचायत काशीपुर में चल रही सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन अयोध्या धाम से पधारे व्यास सत्यम जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं के साथ-साथ दुर्योधन के अहंकार और उसके अंत का दिव्य संदेश सुनाया।

महाराज ने कहा कि दुर्योधन ने जीवनभर धर्म के मार्ग को त्यागकर अहंकार, क्रोध और अन्याय को अपनाया। लेकिन अंततः उसका वही अहंकार उसके विनाश का कारण बना। जब मनुष्य सत्ता और शक्ति के नशे में धर्म को भूल जाता है, तो उसका पतन निश्चित होता है।

कथा के दौरान व्यास जी ने महाभारत युद्ध के पश्चात की घटना का भी वर्णन किया, जब अश्वत्थामा ने क्रोध में आकर पांडवों के पांचों पुत्रों का नींद में वध कर दिया था। उन्होंने बताया कि यह घटना धर्म के विरुद्ध कर्मों का परिणाम थी, जिसने अश्वत्थामा को शाश्वत पीड़ा और श्राप का भागी बना दिया। उन्होंने कहा कि यह प्रसंग यह सिखाता है कि क्रोध और प्रतिशोध का अंत हमेशा विनाश में होता है।

व्यास जी ने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे श्रीकृष्ण ने पांडवों के पक्ष में धर्म की स्थापना के लिए मार्ग प्रशस्त किया, वैसे ही प्रत्येक व्यक्ति को अपने भीतर के दुर्योधन और अश्वत्थामा रूपी अहंकार, क्रोध और प्रतिशोध को समाप्त करना चाहिए।

कथा के दौरान श्रद्धालु बार-बार “जय श्रीकृष्ण” के उद्घोष से वातावरण को भक्तिमय बनाते रहे। कथा के मुख्य यजमान गंगा प्रसाद पांडेय रहे, जिन्होंने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर अवधेश पांडे, सचिन शुक्ला, आशीष विश्वकर्मा,प्रधान सूर्यकुमार द्विवेदी, संजय पांडे, अरुण पांडे, आशीष पांडे सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं और बच्चे उपस्थित रहे।

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