बिना सत्संग के विवेक जागृत नहीं होता और सत्संग तभी संभव है जब राम की कृपा होती है: पं मधुकर तिवारी

बनीकोडर बाराबंकी/ बिन सत्संग विवेक ना होई, राम कृपा बिन सुलभ न सोई,
बिना सत्संग के विवेक जागृत नहीं होता और सत्संग तभी संभव है जब राम की कृपा होती है।
उक्त बातें संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन आयोजक ज्वाला प्रसाद कौशल कोटवा धाम रोड कथा व्यास पंडित सर्वेश कुमार तिवारी मधुकर अयोध्या धाम से पधार कर कहीं।
आगे उन्होंने कहा कि सत्संग की महिमा अपार है सत्संग का मतलब सत्य का साथ मनुष्य जब तक सत्य का आश्रय नहीं लेगा तब तक उसे भगवान की कृपा नहीं मिलेगी ।उन्होंने कहा कि संतों के दर्शन से मुक्ति मिलती है इसलिए मनुष्य को सत्संग के साथ-साथ संतों का दर्शन अवश्य करना चाहिए।इस अवसर पर मुख्य जजमान ज्वाला प्रसाद
कौशल ,श्रीमती सुशीला देवी, राम आसरे कौशल, गुलाब देवी ,रमेश कौशल विनोद कौशल पिंटू कौशल, नन्हे कौशल अखिलेश कौशल संतोष कौशल प्रदीप कौशल राम कैलाश कौशल आदि तमाम भक्त मौजूद रहे।

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