बनीकोडर बाराबंकी, जब-जब पृथ्वी पर दुष्टो का अत्याचार बढ़ता है तब तक भगवान को दुष्टो का संघार करने के लिए किसी न किसी रूप में अवतरित होना पड़ता है ,जो अस्त्र शस्त्र से नहीं मरता वह पुष्प के वाणों से धराशाई हो जाता है ।
उक्त बातें श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा कोटवा धाम रोड कोटवा सड़क में अयोध्या से पधार कर आए कथा व्यास पंडित सर्वेश कुमार तिवारी मधुकर अयोध्या धाम ने कही।
उन्होंने आगे कहा कि भगवान कृष्ण के जन्म की कथा सुनाते हुए कहा कि कंस का जब अत्याचार बड़ा तो भगवान कृष्ण ने देवकी
वासुदेव के पुत्र के रूप में जन्म दिया जब कंस को मालूम हुआ कि देवकी की आठवीं संतान उसके कल के रूप में आएगी तो उसने क्रोधित होकर देवकी को ही मारना चाहा लेकिन वासुदेव की अनुमय विनय के बाद देवकी को न मार कर दोनों को कैदखाने में डाल दिया ।
उसने उत्पन्न सभी संतानों को करने का प्रण कर डाला ।
कथा का विस्तार देते हुए आगे कहा कि उसे क्या मालूम था जिसकी रक्षा करने वाले गोकुल में पैदा हो चुके हैं उनको कौन मार सकता है जब कंस को मालूम हुआ तो उसने कृष्ण को मारने के लिए पूतना अकसुल बकासुर आदि राक्षसों को भेजा लेकिन कृष्ण जी ने सभी को बाल्यावस्था में ही मार गिराया ।इसके बाद वाचक ने कई कथाओं का वर्णन किया जिसको सुनकर भक्ति भाव विभोर हो गए ।इस अवसर पर आयोजक ज्वाला प्रसाद कौशल, श्रीमती सुशीला, आदर्श व्यापार मंडल अध्यक्ष डा एमएल साहू ,सर्वेश कौशल विनोद कौशल दुर्गेश कुमार अखिलेश कुमार धर्मेंद्र कौशल सुरेंद्र कुमार कौशल संतोष कुमार प्रदीप कुमार राम सजीवन मिश्रा सहित तमाम भक्त मौजूदरहे।
