मर्यादा और त्याग के जीवंत आदर्श हैं श्रीराम
बनीकोडर बाराबंकी: रामलीला परिसर, शुक्लनपुरवा में चल रहे श्री राम महायज्ञ के चौथे दिन कथाव्यास पं.अनिल पांडेय ने कहा कि ईश्वर सर्वव्यापक है, किंतु उनके दर्शन साधक की भावना के अनुरूप होते हैं, जिस हृदय में जैसी श्रद्धा और भक्ति होती है, प्रभु उसी रूप में प्रकट होते हैं। निष्कपट भाव, निर्मल मन और अटूट विश्वास ही प्रभु प्राप्ति का सच्चा मार्ग है। यज्ञों के रक्षक भगवान श्रीराम की लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि जब-जब अधर्म, अन्याय और अत्याचार बढ़ा, तब-तब भगवान ने अवतार लेकर ऋषि-मुनियों के यज्ञों और धर्म की रक्षा की। कहा कि श्रीराम मर्यादा, सत्य, त्याग और करुणा के जीवंत आदर्श हैं।
संयोजक आचार्य मोहित शुक्ल,यज्ञाचार्य आचार्य केशवानंद, पत्रकार केपी तिवारी, अखिलेश चतुर्वेदी, सुशील मिश्रा द्विवेश तिवारी, पार्थ चतुर्वेदी मौजूद रहे।
