बाराबंकी में अजाखाने से निकला सालाना जुलूसे सफरः लाइनपुरवा से देवा रोड होते हुए इमामबाड़े में पहुंचा
रिपोर्टर रहमान अली खान, बाराबंकी। लाइनपुरवा स्थित स्व. अली शब्बर के अज़ाखाने से सालाना जुलूस-ए-सफर अपने रवायती अंदाज में निकला। जुलूस का आगाज़ तिलावते कलामें पाक़ से किया गया। इससे पहले मौलाना आग़ा अली द्वारा संबोधित मजलिस का आयोजन हुआ। मजलिस के बाद जुलूस परंपरागत रूप में निकला। इसमें अलम-ए-मुबारक, ताबूते अली अकबर और शबीहे जुल्जूनाह इमाम हुसैन की ज़ियारत कराई गई। जुलूस में बाराबंकी की अंजुमन गुंन्चए अब्बासिया और अंजुमन गुलामे अस्करी सहित लखनऊ से आई प्रसिद्ध अंजुमन गुलदस्त-ए-हैदरी के साहबे बयाज़ शानू ने अपने विशेष अंदाज में नौहाख्वानी और सीनाजनी की। जुलूस अपने निर्धारित मार्ग से लाइनपुरवा से देवा रोड, रफ़ी नगर के सामने से होते हुए दुर्गापुरी मोहल्ले से गुजरा। देर रात यह जुलूस मौलाना गुलाम अस्करी हॉल इमामबाड़े में पहुँचकर समाप्त हुआ। जुलूस के दौरान मरहूम मेंहदी अली, ताकि मास्टर, इफ्तेखार अली, मरहूम तहज़ीब अस्करी और समीर अब्बास द्वारा चाय, पानी और शरबत की व्यवस्था की गई। जुलूस की अलविदाई मजलिस को मौलाना मोहम्मद रज़ा रिज़वी ने संबोधित किया। जुलूस के संयोजक कल्बे जावेद अली और खानवाद-ए-अली शब्बर के परिवार ने सभी मोमिनीन, मोमिनात और मातमी अंजुमनों का आभार व्यक्त किया।
